Bringing Today's Stories and news to Your Screen

Blog

दिल्ली के उत्तम नगर में हुए तरुण की मौत ने पूरे भारत देश को हिला के रख दिया है . मामला होली के अवसर पर हुए मामूली विवाद से शुरू होकर तरुण की मौत पर जाकर ख़त्म हुआ .. पूरा देश स्तब्ध है की मामूली सा रंग लगाने या बलून फेंकने से किसी का धर्म कैसे ख़राब हो सकता है / क्या किसी मजहब के भगवान् या अल्लाह इतने बुरे हो सकते हैं की नाराज हो जायेंगे .

बहुत दिल दुखता है इन सब छोटी छोटी बातों से घर का चिराग बुझा दिया जाता है /हम जंतर मंतर पर कैंडल लेकर पहुँच जाते हैं भीड़ इकठी कर लेते हैं लेकिन एक दो दिन के बाद सब अपे अपने अपने घर को चले जाते हैं. लेकिन फिर कभी पलट कर उस घर के अंदर झांक कर नहीं देखते लेकिन कभी सोचा है की अगर ये हादसा इश्वर न करे हमारे घर हुआ तो हम कैसे सम्हालेंगे अपने आप को .

ये हिन्दू मुश्लिम का देश है हिंदुस्तान यंहा सब मिलकर रहते थे अभी भी बहुत प्यार रहता लेकिन ये जो नेता लोग है बस अपनी रोटी सेकने के लिए हिन्दू मुश्लिम करते है हमें मज्हब की दीवारों में बांटते हैं . रंगों के आधार पर बांटे फिरते है इन्हें क्या है 5 साल या 10 में चले जायेंगे और जिन्दगी भर के लिए भत्ता मिलेगा /

देश में इतनी बेरोजगारी है महंगाई है प्रदूषण की समस्या है दिन प्रति दिन सांस लेने में लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है पेड़ दिन रात लाखों की मात्रा में काटे जा रहें है लेकिन इन मंदबुद्धि नेताओं को हिन्दू म्श्लामन मुस्लमान करने से फुरशत हो तब न बेसिक सी चीजों पर ध्यान जाए..

वह दिन दूर नही जब भारत का नाम बदल जायेगा.

जब देखो तब किसी शहर का नाम बदल दिया जाता है किसी मुसलमान के नाम पर है तो उसको हटा कर हिन्दू वाला नाम रख देंगे इससे क्या होगो अशिक्षा घटेगी या द्वेष भावना बढ़ेगी कौन बताएगा इनको .हमें इस बात को खुद ही समझना होगा और सही गलत का फैसला लेना होगा देश में पढ़े लिखे नेताओं की जरुरत है की देश को टुकडो में न बांटे . आप सोचिये आपका जन्म अलीनगर में हुआ है और आपके जहन में वो नाम बचपन से बस चुका है और एक नेता आते हैं या आती हैं और उसका नाम सीतापुर या सियानगर रख दे हिन्दू हो या मुश्लामन उसको गलत लगना चाहिए लेकिन वो आवाज नहीं उठा पायेगा क्यूंकि कब उसके परिवार को आग के हवाले कर दिया जायेगा ये बात वो भी जान नही पायेगा नाम हिंदु या मुश्लामना का नहीं नाम attechment का भावनात्मक जुड़ाव का है लेकिन इन नेताओं ने तो जैसे ठेका ले रखा है नामों को चुन चुन के हटाने का क्या ही कर सकते हैं जब तक ये देश के टुकड़े नहीं करेंगे तब तक इनकी रोटी कैसे सिकेगी …

मुझे अखलाक याद या रहा है जब उसके घर में beaf होने के शक पर ही उसके घर में आग लगा दी गयी ….बताइए जो देश दुनिया में सबसे बड़ा beaf का निर्यातक हो उस देश में किसी के घर में beaf होने के शक में आग लगा दिया जाता है क्या उस देश के प्रधानमंत्री को नहीं पता होगी ये बात ये उनके नाक के नीचे ये सब होता है जब मैं सोशल मीडिया पर रहती हूँ तो देखती हूँ की कैसे विदेशों से वंहा के मुसलमान विडियो बना कर शोपिंग माल से प्रधानमंत्री को सम्बोधन करते हैं की देखिये कैसे आपके देश से beaf आ रहा है और उसपर साफ़ साफ़ भारत लिखा होता है / calf का अलग से डिब्बा होता है सील पैक अजीब लग रहा होगा न आपको लेकिन ये सत्य है मेरा भी दिल कट कर रह जाता है , यकीं मानिये जब अख़लाक़ का मामला सामने आया था तब उझे पता चला की की लोग beaf भी खाते हैं और मेरे रोंगटे खड़े हो गये थे. जिस देश में गे की ये स्थिति है हर गली में गाय कूड़ा खाते दिख ही जाती है . मैंने देश के लगभग हर राज्य में गाय को कूड़ा चुन कर खाते हुए देखा है सिवाय वृन्दावन में मैंने गायों की इज्जत होते देखि वैसी इज्जत हर राज्य और शहर में हो तो भारत स्वर्ग ही जायेगा …जब मैं अयोध्या घूम रही थी तो बस एक गोशाला देखा वंहा भी गाय की स्तिथि कोई बहुत बढ़िया नहीं थी … हमें गाय हमारी माता है उसको नेशनल एनिमल घोषित करने की मांग की जाती है . तो ये नेता लोग पहले गाय की स्थिति को ठीक करें हमारे टैक्स के जो पैसे होते हैं उनसे ही इनके लिए खाने पिने का इंतजाम करवाए लेकिन नहीं इन्हें तो बस लड़ाई करवानी है /

वही गाय कचरे की पन्नी चबाती है तो गाय मालिक को कोई सजा नहीं दी जाती वो गाय को खुल्ला छोड़ देते हैं क्या कही हरियाली है सडक पर वो तो कूड़ा ही खाएगी न या तो हा पूरे वीगन हो जाएँ ..जब तक हम सब मिलकर डेरी प्रोडक्ट बंद नहीं करते तब ता ये डेरी मालिक गायों पर जुल्म करना नहीं बंद करेगी और इन नेताओं को क्या है की थोड़े पेड़ पोधे ही लगवा ले हमारे पैसे से लेकिन ये बस पैसों की बर्बादी करेंगे रोड तोड़ेंगे फिर जोड़ेंगे फिर तोड़ेंगे क्यूंकि सीवर लाइन डालना भूल जाते हैं न इन सबमें आपको कितनी दिक्कत होती है इन्हें कोई मतलब नहीं और अगर कोई गड्ढे में गिर के मर गया तो इन्हें क्या ही मतलब है …. फिर हम भी फिर झंडा लेकर जंतर मंतर पहुँच जायेंगे बस यही हो रहा है हम किसी मुद्दे के बारे में सोच भी नहीं सकते क्यूंकि हम तो तो धर्म की पट्टी बांधे हैं अपनी आँखों पर अगर हम मुश्ल्मान है तो होली पर हंगामा करेंगे और अगर हम हिन्दू हैं तो उनके रमजान में बकरे काटने पर हंगामा करेंगे बस यही हमारे नेताओं ने हमें सिखाया है हम तो यही करेंगे ..

कभी जमीन की खुदाई में अगर कोई भगवान की मूर्ति मिल गयी तो इनकी बल्ले बल्ले और अगर उसके ऊपर कोई मस्जिद हो तो इनकी रोटी तो महीनो तक के लिए सिक गयी … और हम भी खुश हो जाते हैं बताओ शुरू से हिन्दू थे फिर मुग़ल आये वो तोड़ फोड़ करते हमारे मन्दिर को तोड़ देते थें फिर उसपर अपना कब्ज़ा जमाते मस्जिद बना दी क्यूंकि इन्होने न जाने कितने सालों तक हमारे उपर शाषण किया अब उस स्थिति में मस्जिद के निचे मंदिर निकल रहा है तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए लेकिन हम इतने खुश हो जाते हैं एक हॉस्पिटल या स्कूल बनाने के लिए चंदा इकठा करने जाते हैं तो एक रुपया नहीं निकलता किसी के जेब से लेकिन नदीर के ना पर हजारों लाखों निकल जाता है है न आश्चर्य की बात नहीं हें कोई आश्चर्य करने की जरुरत नहीं जब करोना का टाइम हा तो इन मंदिरों को बंद क्यूँ किया गया इन नेताओं ने क्यूँ नहीं मंदिर के दरवाजे खुलवा दिए दान पेटी निकलवा दिया गरीबों के लिए नहीं तब सब भगवन गेट बंद करके सो गये आप याद करिए आपकी जान हॉस्पिटल में जाकर बची लेकिन आप फिर भी आँखें नहीं खोलते तो कोई क्या ही कर सकता है आपको अगर मेरी बात सही लगा तो आप जरुर बताइयेगा / की हमें इन नेताओ की बातों में आकर आपस में लड़ने की ज़रूरत है या एक दुसरे का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ने की ज़रूरत है/