Indian archers now challenge South Korea on equal terms
-Indian Archers on the Rise: अब दक्षिण कोरिया को टक्कर दे रहे भारतीय तीरंदाज
New Delhi: भारतीय तीरंदाज अब उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं जहां वे विश्व स्तर पर दक्षिण कोरिया जैसे दिग्गजों का मुकाबला अपने दम पर कर रहे हैं।
हाल के अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भारत के युवा और अनुभवी तीरंदाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया को दिखा दिया है कि अब भारतीय तीरंदाजी एक नई ऊंचाई पर है।
पूर्व अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज और कोच पूर्णिमा महतो के अनुसार, पहले कोरियाई खिलाड़ी सामने आते ही भारतीयों में दबाव बढ़ जाता था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।
आत्मविश्वास, तकनीक में सुधार और लगातार अंतरराष्ट्रीय अनुभव ने भारतीय टीम को मजबूती दी है।
युवा तीरंदाज शर्वरी शिंदे और धीरज बोर्राडेवेड़ा के ताज़ा प्रदर्शन ने भारत की उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। शर्वरी ने U-18 विश्व चैंपियन को हराकर स्वर्ण मेडल जीता, वहीं धीरज ने पांच बार के ओलंपिक चैंपियन को पछाड़कर सबको चौंका दिया।
2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप की तैयारी के साथ टीम इंडिया अब कोरियाई तीरंदाज़ों के दबदबे को चुनौती देने को तैयार है।
भारतीय कोचों की नई रणनीति, विदेशी प्रशिक्षण और युवा खिलाड़ियों की तेज़ तरक्की इस बदलाव की बड़ी वजह मानी जा रही है।
धीरज ने कहा, “अब हमें कोरिया के नाम से डर नहीं लगता। हम उनके बराबर हैं और उन्हें हराने की क्षमता रखते हैं।”आगामी 2024 पेरिस ओलंपिक और 2025 वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का प्रदर्शन देखने लायक होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह भारतीय तीरंदाजी के सुनहरे दौर की शुरुआत है।—
