संसद में वंदे मातरम् पर बोला सरकार का स्वर, मोदी ने याद दिलाई स्वतंत्रता की
वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर संसद में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन, स्वतंत्रता संग्राम की यादें ताज़ा
नई दिल्ली:संसद में सोमवार को वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर आयोजित विशेष चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक भूमिका और उसके भावनात्मक महत्व को याद करते हुए कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा है।
उन्होंने कहा कि यह गीत उस दौर की धड़कन था, जब देश अंग्रेजों की गुलामी से निकलकर आज़ादी की ओर बढ़ रहा था। मोदी ने बताया कि वंदे मातरम् ने क्रांतिकारियों, विद्यार्थियों और सामान्य नागरिकों में ऐसा साहस भरा, जिसने आज़ादी के संघर्ष को ऊर्जा दी।
मोदी ने 1975 के दौर का उल्लेख कियाअपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने इस तथ्य को भी याद किया कि वंदे मातरम् की 100वीं वर्षगांठ आपातकाल के समय आई थी — एक ऐसा समय जब लोकतांत्रिक अधिकार सीमित थे और असहमति की आवाज़ें दबाई जा रही थीं।
मोदी ने कहा कि आज, जब गीत के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तब भारत पूर्ण लोकतंत्र और मजबूत संविधान के साथ नई ऊँचाइयों पर खड़ा है।
“पूरे गीत की भावना समझनी चाहिए”वंदे मातरम् को लेकर पुराने समय में हुए विवादों पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस गीत को टुकड़ों में नहीं, उसकी संपूर्णता में समझने की ज़रूरत है।उनका कहना था कि वंदे मातरम् भारत की संस्कृति, मातृभूमि और देशभक्ति का संदेश देता है — यह किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की एकता का प्रतीक है।युवा पीढ़ी को जोड़ने की अपीलप्रधानमंत्री ने संसद से आग्रह किया कि आने वाली पीढ़ियों को वंदे मातरम् के इतिहास से परिचित कराया जाए।उन्होंने कहा कि यह गीत सिर्फ बीते समय की धरोहर नहीं, बल्कि भारत के भविष्य को जोड़ने वाला मार्गदर्शन है।विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों की मौजूदगी में विशेष चर्चाइस विशेष सत्र में विभिन्न दलों के नेताओं ने वंदे मातरम् के इतिहास, साहित्यिक पृष्ठभूमि और देश की सांस्कृतिक एकता में उसकी भूमिका पर अपने विचार रखे।
