मिथिला मिरर को बंद करवा दिया मैथिली ने
मिथिला से उठी मीडिया स्वतंत्रता की आवाज़, मिथिला मिरर चैनल बंद होने पर थम नहीं रहा विवाद । दरभंगा जिले के अलीनगर विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा एक मामला इन दिनों स्थानीय मीडिया और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
क्षेत्र की विधायक मैथिली ठाकुर को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उनके प्रभाव या दबाव के चलते मिथिला मिरर चैनल का संचालन बंद कर दिया गया। इस घटना के बाद मीडिया की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।मिथिला मिरर चैनल से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चैनल लंबे समय से स्थानीय समस्याओं, जनहित के मुद्दों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से जुड़े विषयों की कवरेज कर रहा था। इसी दौरान कुछ रिपोर्ट्स को लेकर असंतोष उत्पन्न हुआ और चैनल प्रबंधन पर दबाव बढ़ने लगा। आरोप है कि इस दबाव के परिणामस्वरूप चैनल का प्रसारण रोकना पड़ा।हालांकि, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि चैनल बंद होने के पीछे कोई औपचारिक सरकारी आदेश था या यह निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया। चैनल प्रबंधन की ओर से भी अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे स्थिति पूरी तरह साफ हो सके।इस मामले को लेकर स्थानीय पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों में नाराज़गी देखी जा रही है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में मीडिया को सत्ता और जनप्रतिनिधियों से सवाल पूछने का अधिकार है। यदि किसी चैनल को खबरें दिखाने के कारण बंद होना पड़े, तो यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।पत्रकार संगठनों का मानना है कि मीडिया पर किसी भी प्रकार का दबाव न केवल पत्रकारिता को कमजोर करता है, बल्कि आम जनता के जानने के अधिकार को भी प्रभावित करता है। कुछ संगठनों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मिथिला मिरर चैनल वास्तव में किन कारणों से बंद हुआ।दूसरी ओर, विधायक मैथिली ठाकुर की तरफ से इस विषय पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी फिलहाल इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। ऐसे में कई सवाल अनुत्तरित बने हुए हैं।मीडिया विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह साबित होता है कि किसी जनप्रतिनिधि के दबाव में किसी मीडिया संस्थान को बंद किया गया, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए गंभीर खतरा होगा। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद ज़रूरी है।फिलहाल, अलीनगर और मिथिला क्षेत्र में यह मामला मीडिया स्वतंत्रता की बहस को फिर से तेज कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मुद्दे पर प्रशासन, जनप्रतिनिधि और संबंधित पक्ष क्या रुख अपनाते हैं।
