धर्मेंद्र की आखिरी और अभिताभ के नाती की पहली फिल्म इक्कीस का जानिए रिव्यू
रिव्यू: इक्कीस (Ikkis) — देशभक्ति, बलिदान और भावनाओं की सशक्त कहानी ।हिंदी सिनेमा में जब भी देशभक्ति और युद्ध पर बनी फिल्मों की बात होती है, तो दर्शकों की उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं। साल 2026 की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘इक्कीस (Ikkis)’ भी इसी श्रेणी में आती है। यह फिल्म न सिर्फ एक युद्ध की कहानी कहती है, बल्कि साहस, बलिदान, परिवार और देश के प्रति कर्तव्य की भावना को भी गहराई से दर्शाती है।
कहानी (Story)फिल्म इक्कीस की कहानी भारतीय सेना के एक ऐतिहासिक सैन्य अभियान से प्रेरित मानी जाती है। कहानी का केंद्र एक युवा सैनिक और उसकी यूनिट है, जो बेहद कठिन हालातों में देश की रक्षा के लिए खड़ी होती है।
फिल्म का नाम ही यह संकेत देता है कि यह सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि 21 साल की उम्र, 21 जवान या 21 ऐतिहासिक घटनाओं के प्रतीक के रूप में सामने आती है।
कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और दर्शकों को सैनिकों के व्यक्तिगत जीवन, उनके परिवार, डर, उम्मीदों और बलिदान से जोड़ देती है। फिल्म का इमोशनल एंगल इसे सिर्फ एक युद्ध फिल्म नहीं, बल्कि एक मानवीय कहानी बनाता है।
अभिनय (Acting)फिल्म में अगस्त्य नंदा ने मुख्य भूमिका निभाई है। उन्होंने एक युवा सैनिक के किरदार में आत्मविश्वास और संवेदनशीलता दोनों को बखूबी दिखाया है।
यह कहा जा सकता है कि यह फिल्म उनके करियर के लिए एक अहम पड़ाव साबित हो सकती है।वहीं, धर्मेंद्र की भूमिका फिल्म की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है।
उनका किरदार सीमित स्क्रीन टाइम में भी गहरी छाप छोड़ता है। उनके संवाद, आवाज़ और अनुभव से भरा अभिनय दर्शकों को भावुक कर देता है।
कई दृश्यों में उनकी मौजूदगी फिल्म को एक अलग ही ऊँचाई पर ले जाती है।सहायक कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों के साथ न्याय किया है, खासकर सैनिकों की टीम ने सामूहिक रूप से दमदार प्रदर्शन किया है।निर्देशन और पटकथा (Direction & Screenplay)फिल्म का निर्देशन संतुलित और परिपक्व नजर आता है।
निर्देशक ने युद्ध के दृश्यों और भावनात्मक पलों के बीच अच्छा तालमेल बनाया है। कहीं भी फिल्म जरूरत से ज्यादा ड्रामेटिक नहीं लगती, जो इसे वास्तविकता के करीब रखती है।
पटकथा कसी हुई है, हालांकि कुछ जगहों पर कहानी थोड़ी धीमी लग सकती है, लेकिन भावनात्मक जुड़ाव दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।संगीत और बैकग्राउंड स्कोर (Music & BGM)इक्कीस का बैकग्राउंड म्यूज़िक फिल्म की आत्मा को मजबूती देता है।
युद्ध के सीन में तेज और प्रभावशाली बीजीएम रोमांच पैदा करता है, जबकि भावुक दृश्यों में संगीत दिल को छू जाता है। फिल्म के देशभक्ति गीत लंबे समय तक याद रहने वाले हैं।तकनीकी पक्ष (Technical Aspects)सिनेमैटोग्राफी शानदार है।
पहाड़ी इलाकों, बॉर्डर लोकेशन और युद्ध के मैदानों को बहुत ही रियल तरीके से दिखाया गया है। एक्शन सीक्वेंस जरूरत से ज्यादा बनावटी नहीं लगते, जो फिल्म को विश्वसनीय बनाते हैं।क्या खास है फिल्म में?सच्ची घटनाओं से प्रेरित है कहानी ।
धर्मेंद्र का प्रभावशाली अभिनय देशभक्ति के साथ मानवीय भावनाओं का संतुलन मजबूत बैकग्राउंड स्कोर युवाओं को प्रेरित करने वाला संदेश ।कमजोर पक्ष कुछ हिस्सों में कहानी की गति धीमी ।युद्ध फिल्मों के फॉर्मेट से परिचित दर्शकों को कुछ सीन अनुमानित लग सकते हैं।
निष्कर्ष (Final Verdict)‘इक्कीस (Ikkis)’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उन जवानों को सलाम है जो हर दिन देश के लिए अपने सपनों को दांव पर लगाते हैं। यह फिल्म युवाओं को प्रेरित करती है, बुजुर्गों को भावुक करती है और हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की भावना को मजबूत करती है।अगर आपको देशभक्ति, सच्ची कहानियों और दमदार अभिनय वाली फिल्में पसंद हैं, तो इक्कीस जरूर देखनी चाहिए।
साथ ही आप धर्मेंद्र को आखिरी बार बड़े पर्दे पर देख पाओगे।अपने इमोशन को कनेक्ट कर सकोगे और उनको देखने की चाहत में लोग फिल्मों को हिट भी करा सकते है ऐसे में ये अगस्त्य नंदा की पहली फिल्म है हो सकता है उनका करियर बन जाय और चल जाए।
