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क्या आप जानते हैं कि गूगल किन देशों में है बैन।

गूगल सर्च पर क्या खतरे में है आपकी आज़ादी? बैन, सेंसरशिप और कानूनों को लेकर बढ़ती चिंतान्यूज़

डिजिटल युग में गूगल सर्च आम आदमी की सबसे बड़ी जानकारी की खिड़की बन चुका है। लेकिन हाल के दिनों में गूगल से जुड़े बैन, सेंसरशिप और कानूनी निगरानी को लेकर सवाल तेज़ हो गए हैं। सोशल मीडिया और गूगल ट्रेंड्स में यह चर्चा जोरों पर है कि क्या कुछ सर्च करने पर किसी व्यक्ति को जेल हो सकती है, भारत में कौन-सा सर्च इंजन बैन है, और किन देशों ने गूगल पर प्रतिबंध लगाया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, गूगल खुद किसी व्यक्ति को जेल नहीं भेजता। गूगल एक सर्च प्लेटफॉर्म है, जो यूज़र को इंटरनेट पर मौजूद जानकारी तक पहुंचने में मदद करता है।

लेकिन यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़ी चीज़ें सर्च करता है—जैसे आतंकी सामग्री, बाल शोषण से संबंधित कंटेंट, साइबर अपराध या अवैध हथियार—तो स्थानीय कानून एजेंसियां उस गतिविधि को गंभीरता से ले सकती हैं।

ऐसे मामलों में कार्रवाई कानून के तहत होती है, न कि सिर्फ “सर्च” करने भर से।भारत की बात करें तो यहां किसी बड़े सर्च इंजन पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। गूगल, बिंग और अन्य सर्च इंजन भारत में वैध रूप से काम कर रहे हैं।

हालांकि, आईटी कानून और साइबर नियमों के तहत आपत्तिजनक, भ्रामक या गैरकानूनी कंटेंट को ब्लॉक किया जा सकता है। सरकार समय-समय पर राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था के मद्देनज़र कुछ वेबसाइट्स या लिंक पर रोक लगाती रही है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति अलग-अलग है।

सबसे व्यापक इंटरनेट सेंसरशिप चीन में देखी जाती है, जहां “ग्रेट फ़ायरवॉल” के तहत गूगल और उसकी कई सेवाएं लंबे समय से प्रतिबंधित हैं। इसके अलावा ईरान, उत्तर कोरिया, तुर्कमेनिस्तान और कुछ अन्य देशों में भी राजनीतिक, धार्मिक या सुरक्षा कारणों से गूगल या उसकी सेवाओं पर आंशिक या पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इन देशों में सरकारें अपने नागरिकों की ऑनलाइन गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखती हैं।तकनीकी जानकार बताते हैं कि गूगल 100 प्रतिशत “सच” की गारंटी नहीं देता। सर्च रिज़ल्ट एल्गोरिदम के आधार पर दिखते हैं, जिनमें सही और गलत—दोनों तरह की जानकारी हो सकती है। इसलिए यूज़र्स को किसी भी जानकारी की पुष्टि भरोसेमंद स्रोतों से करनी चाहिए।

इसी तरह यह सवाल भी उठता है कि क्या पुलिस गूगल सर्च ट्रैक करती है। विशेषज्ञ कहते हैं कि सामान्य सर्च पर निगरानी नहीं होती, लेकिन किसी गंभीर जांच या कोर्ट के आदेश पर डेटा मांगा जा सकता है।डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता मानते हैं कि सूचना तक पहुंच लोकतंत्र की रीढ़ है, लेकिन इसके साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है।

यूज़र्स को कानून के दायरे में रहते हुए इंटरनेट का उपयोग करना चाहिए। वहीं सरकारों से अपेक्षा है कि वे सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आज़ादी के बीच संतुलन बनाए रखें।कुल मिलाकर, गूगल सर्च पर बढ़ती चर्चाएं यह संकेत देती हैं कि इंटरनेट अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि नीति और कानून का अहम विषय बन चुका है। आने वाले समय में डिजिटल साक्षरता और साइबर कानूनों की समझ हर नागरिक के लिए उतनी ही जरूरी होगी, जितनी इंटरनेट की पहुंच।

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