विद्यानंद: एक दर्द के प्रतिबिंब
सारांश: ई कथा में हम कह चाहे छी देखवा चाही छी की जहां लोग हिन्दू मुसलमान कीछ ने बुझे या ओत एक्टा छोट छिन गांव में केना अंतर्जातीय विवाह कर के कारण पूरा परिवार छितरा गेल और तीतर बितर भ गेल।एक सदी बीत गेल लेकिन ओकर खामियाजा पूरा परिवार बहुत गलत तरीके से भुगतलक।
कथा के पात्र के नाम हम बदल सके छी लेकिन स्थिति एक एक शब्द सही लिखवा के लेल आतुर छी ई कथा लिख के लेल हम सालों स व्याकुल रही लेकिन कथा के अंत में की लिखबा चाही से समझ न नई आयल लेकिन आई कलम उठा ही लेलो आहा सब बता देव की सही लिख रहल छी या कुछ गलत किया कि मैथिल में ई हमर दोसर कहानी अछी।
विद्यानंद नामके युवा के कथा अछी ई जे कोनो पुरान बात नई छै बहुत वर्ष पुरान नई अहि सदी के कथा छै।90 के दौर छल सब महिला सब पोखर में कोनो बच्चा के उपनयन होयत रहे ऑर ओकरा कुमारन के विधि करवा रहल रहे तभी तालाब के किनारे पर चंदन और खुशबू ओ विधि के देख रहल छले खुशबू अपन नानी गाम आयल छल।
उ विधिः दु गोटे बहुत कौतूहल बस देख रहल छल एक खुशबू और एक विद्यानंद। लोक ता बहुत रहे लेकिन खुशबू दोसर गाम के छल और ओकरा लेल सब नया कियकी ओकर गाम में अहि तरीका स उपनयन नई होय छल। तभी विद्या कहलखिन जे कुछ दिन पहिले हमरो घर में एक्टा उपनयन भेल न्यौता गेल विविध प्रकार के व्यंजन बनल लेकिन गीत नई भेल खुशबू उत्सुकता स विद्या के देखलक जेना आगा जान के लेल उत्सुक भ गेल होय।
विद्या बात के जारी रखला की कोई भोज भी नई खाई एला और कोई गीत ता छोड़ू झांक तक नई एला और सब व्यंजन फेंका गेल। खुशबू के बहुत आश्रय लगल उ पुछलखिन किया न्यौता और बीजो नई केल्हीन ता ऊ चुपचाप आंख में नोर लक उठ का चली बनल।अब खुशबू के कोतुहूलता ज्यादा भ गेल ओकरा याद आब लगले की विद्या के आर्थिक स्थिती त ठीक नई छै। बचपन में ही शायद उ पंजाब चली गेल रहे कमाई के लेल ओह इतेक छोट लड़का के पाई पाई मजबूरी में जोरलक ओकर पैसा के ई हश्र। हे प्रभु आखिर किया ने कोई भोजन खेलके आब खुशबू अपना मन में ई फैसला लेली कि अब जे होय सब बात बुझ के छै चाहे विद्या स दोस्ती किया ने कर पड़े।
Part -2
फिर खुशबू अपन पढ़ाई के लेल बाहर चली गेल और विद्या मजदूरी के लेल अपन दोसर बहिन के साथ शहर चली गेल। समय व्यतीत भ रहल छल , लेकिन खुशबू के अंदर कौतूहलता बढ़ी रहल छलिए की आखिर किया ने ओकरा अंगना सब भोज खाई किए ने कोई गेल रहे आखिर की कारण रहे। ई सब सवाल के जवाब के देत और चिट्ठी ता छोड़ी दिय तभी के समय में बात भी कनी करी लिए ता तील के तार भ जाई छल। फिर दोनों गोटा के भेंट भेल ।खुशबू त जेना अहि समय के इंतजार में छली सीधे पुछलखिन पहिले त स्कूल जाई छल्लों आब अचानक स मज़दूरी किया कर पड़ल। विद्या अपन बात कहनाई शुरू केला । की स्कूल में ओकर दोस्त रहे दियाद लेकिन बहुत बड़ा आदमी के बेटा जेकर समाज में नाम छल उ पेंसिल स कोनो लड़की के नाम लिखक भागी गेल बाद में हमर नाम लगा देलक और चूंकि हम ग़रीब रही ताहि स कोई यक़ीन नई केलक , और स्कूल में लाल कलम लगी गेल जे कारण स हम स्कूल स विदा भेलों।खुशबू सब बात के ग़ौर स सुनी रहल छल ओकर जिज्ञासु मन सब बात जान चाहे छल लेकिन गांव घर के माहौल के कारण ज्यादा बात नई भ पावे कियाकी खुशबू अपन मामा के घर पर रहे छहलखिन और चंचल स्वभाव के कारण उ ओटेक ऊंच नीच स परे रहे छलखिन।आब घर में मां के बहुत छोट उम्र में विवाह भ गेल छल घर त बहुत नीक छल लेकिन पिता जी एक्टा सौतेला बेटा और ऊपर स बाज में असमर्थ ताहि कारण घर में कोई खास वैल्यू नई मिले छलिए और विचारी मां के विवाह होव के तुरंत उपरांत गांव में एक्टा जमीन के टुकड़ा द देल गेल खुशबू अपन बचपन के याद के टुकड़ा के समेट समेट क शब्द सबके जोड़ के कोशिश करेत रहे छली की कहानी पूरा मिल जाए लेकिन बालू जेना हाथ स सब फिसल जाए छल।झोपड़ी केना बनल याद नई छल खुशबू के लेकिन विद्या कहलके जे मां चाहे छै जे गांव में सब कोठा के घर में केना रहे छै से शौख लगे या आब कोठा वाला घर बड़ा बड़ा आदमी के बनवा के लेल सोचे छै। हम सब झोपड़ी वाला आदमी केना बनते ।
