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Meta and YouTube created ‘digital casino’ lawyers argued in courtroom

Photo credit AI

Los Angeles: Reuters

Eli tan and Cecilia

Meta और YouTube ने बनाए ‘डिजिटल कैसीनो’, अदालत में वकीलों की दलील

एलिज़ाबेथ रिडल और सेसिलिया कांगलॉस एंजिल्स — लॉस एंजिल्स की एक अदालत में सोमवार को शुरू हुई सुनवाई में वकीलों ने आरोप लगाया कि Meta और YouTube ने अपने प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए हैं कि वे बच्चों और किशोरों के लिए “डिजिटल कैसीनो” की तरह काम करते हैं।

वादियों का कहना है कि इन कंपनियों ने ऐसे फीचर तैयार किए जो युवाओं को बार-बार ऐप खोलने और लंबे समय तक स्क्रीन पर बने रहने के लिए प्रेरित करते हैं।वादियों के वकील मार्क लैनियर ने अदालत में कहा कि कंपनियों ने तीन “लकड़ी के बैरल” खींचकर एक-दूसरे के ऊपर रख दिए और अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह बनाया कि वे उपयोगकर्ताओं को बांधकर रखें।

उन्होंने कहा, “यह मामला बहुत आसान है। इन कंपनियों ने नशे की लत लगाने वाले दिमाग, बच्चों और किशोरों को निशाना बनाया।”

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देश भर में सैकड़ों मुकदमे सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ दायर किए गए हैं। इन मुकदमों में आरोप लगाया गया है कि कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया कि वे युवाओं में लत जैसी प्रवृत्ति पैदा करते हैं और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

लॉस एंजिल्स सुपीरियर कोर्ट में चल रहा यह मुकदमा उन पहले मामलों में से एक है जिसमें आरोपों की सुनवाई जूरी के सामने की जा रही है। यह मुकदमा 20 वर्षीय कैलिफोर्निया की एक महिला से जुड़ा है, जिसने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया की लत के कारण उसे गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा।

वादियों के वकीलों ने कहा कि YouTube और Instagram बच्चों को इसलिए आकर्षित करते हैं क्योंकि ये ऐप “डिजिटल कैसीनो” की तरह हैं। उन्होंने तर्क दिया कि इन प्लेटफॉर्म पर मौजूद फीचर, जैसे अंतहीन स्क्रॉल, ऑटो-प्ले वीडियो और एल्गोरिदमिक सिफारिशें, स्लॉट मशीनों की तरह काम करती हैं, जो उपयोगकर्ताओं को बार-बार सामग्री देखने के लिए प्रेरित करती हैं।

लैनियर ने कहा कि K.G.M. एक ऐसी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करती हैं जो कम उम्र में ही सोशल मीडिया से जुड़ गई और जिसके विकास पर इसका गहरा असर पड़ा। उन्होंने अदालत में कहा कि कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों को तकनीक से जुड़े जोखिमों की जानकारी थी।

Meta के वकीलों ने इन आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि कंपनियों ने जानबूझकर उपयोगकर्ताओं को नुकसान पहुंचाने या उन्हें लत लगाने के उद्देश्य से प्लेटफॉर्म नहीं बनाए। उनका तर्क था कि सोशल मीडिया केवल एक माध्यम है और युवाओं की समस्याओं के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

Meta के वकीलों ने यह भी कहा कि वादियों का दावा है कि K.G.M. को पारिवारिक दुर्व्यवहार और अन्य कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, जो उसके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती थीं। उन्होंने कहा कि यह केवल सोशल मीडिया का परिणाम नहीं है।मुकदमे में यह भी तर्क दिया गया कि कंपनियों ने ऐसे फीचर तैयार किए जो उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक ऐप पर बनाए रखते हैं।

वादियों ने कहा कि एल्गोरिदमिक सिफारिशें उपयोगकर्ताओं को ऐसी सामग्री दिखाती हैं जो उन्हें और अधिक देखने के लिए प्रेरित करती हैं, जिससे उपयोग की अवधि बढ़ती है।इस मामले में TikTok और Snapchat जैसे अन्य प्लेटफॉर्म का भी उल्लेख किया गया है। देश भर में दायर मुकदमों में इन कंपनियों पर भी आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने ऐसे उत्पाद विकसित किए जो युवाओं के लिए हानिकारक हो सकते हैं।वादी पक्ष का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों ने अपने प्लेटफॉर्म को इस तरह डिजाइन किया कि वे उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करें और उन्हें बार-बार वापस आने के लिए प्रेरित करें।

उनका दावा है कि यह रणनीति युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।कंपनियों की ओर से कहा गया कि सोशल मीडिया का उपयोग करने के पीछे व्यक्तिगत और सामाजिक कारक भी होते हैं, और केवल प्लेटफॉर्म को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।यह मुकदमा व्यापक कानूनी लड़ाई का हिस्सा है, जिसमें सोशल मीडिया कंपनियों पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने युवाओं को होने वाले संभावित नुकसान के बावजूद अपने उत्पादों में बदलाव नहीं किए।

आने वाले समय में यह मामला यह तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है कि क्या सोशल मीडिया कंपनियों को अपने प्लेटफॉर्म की डिजाइन और एल्गोरिदम के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।अदालत में सुनवाई जारी है और जूरी को यह तय करना होगा कि क्या Meta और YouTube ने ऐसे उत्पाद बनाए जो युवाओं के लिए हानिकारक सिद्ध हुए। इस मुकदमे का परिणाम भविष्य में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ दायर अन्य मामलों को भी प्रभावित कर सकता है।

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