Anjum Maudgil Wins Bronze as Aakriti Misses Medal in 50m Rifle 3 Positions Final
नई दिल्ली : मेडल के करीब आकर चूकीं आकृति, अंजुम मौदगिल ने 50 मीटर राइफल 3 पोज़िशन में दिलाया कांस्य पदक.
50 मीटर राइफल 3 पोज़िशन स्पर्धा में भारतीय निशानेबाजों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। जहां अंजुम मौदगिल ने बेहतरीन खेल दिखाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया, वहीं आकृति दहिया मामूली अंतर से पदक से चूक गईं। यह मुकाबला बेहद रोमांचक रहा और अंत तक परिणाम को लेकर उत्सुकता बनी रही।इस स्पर्धा में खिलाड़ियों को तीन अलग-अलग पोज़िशन—नीलिंग (घुटनों के बल), प्रोन (लेटकर) और स्टैंडिंग (खड़े होकर)—में निशाना साधना होता है।
यही कारण है कि इसे शूटिंग की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में गिना जाता है। तकनीकी कौशल, संतुलन, धैर्य और मानसिक मजबूती—इन सभी का सटीक संयोजन इस इवेंट में सफलता दिलाता है।अंजुम मौदगिल ने शुरुआत से ही संयमित प्रदर्शन किया। उन्होंने अपने शॉट्स पर पूरा नियंत्रण रखा और हर पोज़िशन में स्थिरता दिखाई। खासकर स्टैंडिंग पोज़िशन में उनका प्रदर्शन निर्णायक साबित हुआ। अंत में उन्होंने कांस्य पदक जीतकर भारत को गर्व का मौका दिया।
यह उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।वहीं दूसरी ओर आकृति दहिया ने भी शानदार संघर्ष किया। क्वालिफिकेशन राउंड में उन्होंने बेहतरीन स्कोर करते हुए फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में भी वह पदक की दौड़ में मजबूती से बनी रहीं, लेकिन अंतिम चरण में कुछ अंक पीछे रह जाने के कारण वह चौथे स्थान पर रहीं। हालांकि पदक उनसे दूर रह गया, लेकिन उनका प्रदर्शन यह संकेत देता है कि आने वाले समय में वह बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकती हैं।इस प्रतियोगिता में अन्य देशों के निशानेबाजों ने भी कड़ा मुकाबला दिया। फाइनल मुकाबला बेहद करीबी रहा और हर शॉट के साथ स्थिति बदलती नजर आई। ऐसे दबाव में भी भारतीय खिलाड़ियों ने जिस तरह से आत्मविश्वास दिखाया, वह काबिले तारीफ है।
50 मीटर राइफल 3 पोज़िशन इवेंट में खिलाड़ियों को लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखनी होती है। हल्की सी चूक भी स्कोर पर बड़ा असर डाल सकती है। यही कारण है कि इस स्पर्धा में मानसिक संतुलन सबसे अहम भूमिका निभाता है। अंजुम ने इस दबाव को बखूबी संभाला और अनुभव का फायदा उठाया।भारतीय शूटिंग टीम के लिए यह प्रदर्शन सकारात्मक संकेत है। हाल के वर्षों में भारत ने शूटिंग में कई अंतरराष्ट्रीय पदक जीते हैं और युवा खिलाड़ियों की नई पीढ़ी लगातार उभरकर सामने आ रही है। आकृति जैसी प्रतिभाशाली निशानेबाजों का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारत के पास भविष्य के लिए मजबूत विकल्प मौजूद हैं।कोचिंग स्टाफ ने भी खिलाड़ियों की तैयारी की सराहना की।
कड़ी ट्रेनिंग, तकनीकी सुधार और मानसिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया गया था, जिसका परिणाम इस प्रतियोगिता में देखने को मिला। अंजुम की सफलता और आकृति का संघर्ष, दोनों ही भारतीय शूटिंग के उज्ज्वल भविष्य की कहानी कहते हैं।हालांकि आकृति पदक से चूक गईं, लेकिन उनका जज़्बा और प्रदर्शन सराहनीय रहा। खेल में हार-जीत लगी रहती है, लेकिन निरंतरता और आत्मविश्वास ही खिलाड़ी को आगे बढ़ाते हैं। आने वाले टूर्नामेंट्स में उनसे और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।कुल मिलाकर, यह प्रतियोगिता भारत के लिए संतोषजनक रही।
अंजुम मौदगिल का कांस्य पदक और आकृति दहिया का दमदार प्रदर्शन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए गर्व का विषय है। भारतीय शूटिंग दल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने और पदक जीतने की क्षमता रखता
