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मैं विस्मित हो जाती हूँ ये सुनकर लोग राम मंदिर में हुए चंदा चोरी का हिसाब मांग रहें हैं ।

शायद भगवान आपको यह बताने की कोशिश कर रहे हँ की मैने तो कभी भी सोने की रामायण मांगी ही नहीं मैने कभी नहीं कहा कि चांदी का काग भूषण्डी चढ़ाओ क्या कभी उन्होंने सपने में मांगा नहीं न।

कभी आज तक भगवान ने एक रसगुल्ला भी खाया हो तो बताओ वो कभी नहीं मांगते उन्हें देना चाहिए और देने वालों को देते भी हैं ।

मेरी बात छोड़ दो मैं तो वही मिठाई चढ़ाती हूं जो मुझे पसंद है क्योंकि भगवान तो एक भी नहीं लेते ज्यादा अच्छी हुई तो पंडित जी ले लेते है नहीं तो प्रसाद। ने मिला देते हैं ।

मैने किसी से सुना कहते हुए कि भक्तों ने इतना दान दिया कि सोने का मंदिर बना दिया जाता चलो हमारे देश में अस्पताल के नाम पर किसी से एक रुपया दान नहीं निकलता लेकिन मंदिर के लिए पता नहीं कहां से पैसे आ जाते है। जबकि करोना में साक्षात उदाहरण देख लिया सब मंदिर के पट बंद थे लेकिन अस्पताल ही खुले थे मरने के बाद स्वर्ग सबको चाहिए लेकिन जिंदा स्वस्थ रहने के लिए कुछ नहीं करना वो सरकार की जिम्मेदारी है।

मेरे घर के पास छोटा सा ही मंदिर है लेकिन जब तक पैसे नहीं चढ़ाओगे तिलक तक नहीं लगाते पंडित जी फिर आपने सोने की रामायण भगवान के मंदिर में इन पुजारियों को सौंप कर क्या सोचा आपको भी स्वर्ग में सोने का सिंहासन मिलेगा मरने के बाद किसको क्या मिलेगा ये आज तक कोई किसी को बताने नहीं आया ।

हा एकाध पुनर्जन्म के किस्से सुने हैं लेकिन वो अपना बदला लेने आते है किसी ने भी स्वर्ग या नर्क की कथा नहीं सुनाई ।

इसलिये आपके पास बहुत पैसे है तो जरूरतमंद को दे दो न सामने से दुआएं मिलेंगे किसी यतीम के पढ़ने की जिम्मेदारी ले लो न उसके मुस्कान ।e आपको प्रभु दिखेंगे ।

मंदिर में एयर कंडीशन लगाने से मूर्तियों को सर्द करने से जो मजदूर 42 डिग्री में तपते हैं उन्हें पंखे ही दान कर दो देखो कितनी आत्मा को शांति मिलेगी ।

मुझे तो लगता है पत्थर के मूर्त भी हैरान हो गए होंगे ये देखकर कि हम इतने काबिल है कि दूसरे की मदद कर सके लेकि। हम मूर्तियों को घूस देते रहते हैं कि जैसे अभी है वैसे अगले जन्म में भी रहें।

इसलिए रामल्ला ने भक्तों के आँख से पर्दा हटाने के लिए ये सब रचा है कि मेरे जन्म स्थल को लूटकी नगरी बना दी अरे अंधभक्त जब भगवान को राजा बनना था तो वे सब छोड़ के 14 वर्ष के बनवास को चले गए और अब इन सब चीजों से उनका क्या लेना देना ।

अगर आप मंदिर में कुछ भी चढ़ावा करते हैं तो वो पुजारी का ही होता है आप चौबीस घंटे निगरानी नहीं कर सकते।चाहे बड़ा मंदिर हो छोटा मैने अभी रवि किशन जी जो कि एक ब्राह्मण भी है और संसद सदस्य दान करने के बाद वो ब्राह्मणों का हो जाता है इसी तरह की बात कही थोड़ी देर के लिए मैं आहत हुई लेकिन सही तो कहा भगवान तो एक चम्मच खीर भी नहीं खाते फिर सोने रुपया चांदी स्नेह क्या मतलब।

खैर मेरी बात किसी को बुरी लगे तो मैं कोई माफी नहीं मांगने वाली आप दान कैसे करते है। सोच समझ के किया करे किसी जरूरतमंद को दे।फिर देखें कितना आनंद आता है।

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