चीन के निराधार दावों पर भारत का कड़ा रुख, कांग्रेस ने पीएम से जवाब मांगा
चीन के दावों पर भारत की सख्त प्रतिक्रिया, कांग्रेस ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की
नई दिल्ली- भारत और चीन के बीच एक बार फिर कूटनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। हाल ही में चीन के विदेश मंत्री द्वारा भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) को लेकर दिए गए बयान को भारत ने पूरी तरह निराधार और तथ्यहीन बताया है। चीन के इस दावे पर देश की सियासत भी गरमा गई है और कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री से इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, चीन का यह कहना कि उसने भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता कर संघर्ष विराम में भूमिका निभाई, पूरी तरह गलत है। भारत ने स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान से जुड़े सभी मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।
भारतीय पक्ष ने यह भी दोहराया कि संघर्ष विराम से जुड़े फैसले दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधे संवाद के जरिए लिए गए थे।
सूत्रों का कहना है कि चीन का यह बयान उस समय आया है, जब वह खुद सीमा विवाद और क्षेत्रीय तनावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय दबाव में है। भारत सरकार का मानना है कि ऐसे बयान वास्तविक तथ्यों से ध्यान हटाने की कोशिश हो सकते हैं।
भारत ने पहले भी कई बार साफ किया है कि वह किसी भी बाहरी शक्ति को अपने आंतरिक या पड़ोसी मामलों में दखल देने की अनुमति नहीं देगा।इस बीच विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को पारदर्शिता दिखानी चाहिए।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री को देश को यह बताना चाहिए कि चीन किस आधार पर ऐसे दावे कर रहा है और सरकार ने इस पर क्या कूटनीतिक प्रतिक्रिया दी है।
कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि जब देश की सीमाओं पर तनाव बना हुआ है और चीन के साथ पहले से ही रिश्ते सहज नहीं हैं, तब ऐसे बयान चिंता बढ़ाने वाले हैं।
पार्टी ने मांग की है कि सरकार संसद और जनता दोनों को भरोसे में लेकर स्थिति स्पष्ट करे।विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह बयान उसकी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार, चीन कई बार क्षेत्रीय मामलों में अपनी भूमिका बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता रहा है, ताकि वैश्विक मंच पर अपनी छवि एक प्रभावशाली मध्यस्थ के रूप में बना सके।
हालांकि भारत की विदेश नीति हमेशा से स्पष्ट रही है कि वह अपनी संप्रभुता और निर्णय लेने की स्वतंत्रता से कोई समझौता नहीं करेगा।भारत ने यह भी रेखांकित किया है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की बातचीत केवल आपसी सहमति और सीधे संवाद के माध्यम से ही संभव है। भारत का रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते, और किसी तीसरे देश की भूमिका स्वीकार्य नहीं है।कुल मिलाकर, चीन के इस दावे ने एक बार फिर भारत-चीन संबंधों की संवेदनशीलता को उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस मुद्दे पर किस तरह की कूटनीतिक रणनीति अपनाती है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत अपना पक्ष कैसे मजबूती से रखता है।
