Hypothesis
(Hypothesis) : सांख्यिकीय परीक्षण का आधारअनुसंधान (Research) में परिकल्पना एक ऐसा कथन होता है, जिसकी जाँच सांख्यिकीय विधियों द्वारा की जाती है। किसी भी शोध अध्ययन में प्राप्त परिणामों को परखने के लिए परिकल्पना का परीक्षण आवश्यक होता है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि प्राप्त निष्कर्ष संयोग (chance) के कारण हैं या नहीं।
सांख्यिकीय परीक्षण में सामान्यतः दो प्रकार की परिकल्पनाएँ होती हैं—शून्य परिकल्पना (Null Hypothesis – H₀) तथाअनुसंधान परिकल्पना (Research Hypothesis – H₁)।जब शोध के परिणाम महत्वपूर्ण (significant) होते हैं, तब शून्य परिकल्पना को अस्वीकार कर दिया जाता है और अनुसंधान परिकल्पना को स्वीकार किया जाता है।महत्त्व स्तर (Level of Significance)किसी शोध अध्ययन की सांख्यिकीय महत्ता निर्धारित करने के लिए शोधकर्ता एक संभाव्यता स्तर निर्धारित करता है, जिसे महत्त्व स्तर कहा जाता है।
इसी स्तर के आधार पर शून्य परिकल्पना की जाँच की जाती है।महत्त्व स्तर को छोटे अक्षर p द्वारा दर्शाया जाता है, जैसे—p ≤ .05 या p ≤ .01।इसका अर्थ यह होता है कि यदि शोध परिणामों की संभाव्यता इस निर्धारित स्तर से कम या उसके बराबर हो, तो परिणामों को सांख्यिकीय रूप से महत्त्वपूर्ण माना जाता है।
उदाहरण के लिए, .05 स्तर का अर्थ है कि शून्य परिकल्पना को अस्वीकार करने में 5 प्रतिशत तक त्रुटि की संभावना स्वीकार की जाती है।शून्य परिकल्पना का अस्वीकारयदि शोध के परिणाम यह दर्शाते हैं कि प्राप्त संभाव्यता महत्त्व स्तर से कम है, तो शोधकर्ता शून्य परिकल्पना को अस्वीकार कर देता है।यदि परिणामों की संभाव्यता अधिक होती है, तो शून्य परिकल्पना को अस्वीकार नहीं किया जाता।
व्यवहार में, स्वीकृति और अस्वीकृति का प्रयोग मुख्य रूप से अनुसंधान परिकल्पना के लिए किया जाता है, न कि सीधे शून्य परिकल्पना के लिए।अस्वीकृति क्षेत्र एवं संरक्षण क्षेत्रसैद्धांतिक सैम्पलिंग वितरण में उस क्षेत्र को, जहाँ शून्य परिकल्पना अस्वीकार की जाती है, अस्वीकृति क्षेत्र (Region of Rejection) कहा जाता है।इसके विपरीत, जिस क्षेत्र में शून्य परिकल्पना बनी रहती है, उसे संरक्षण क्षेत्र (Region of Retention) कहा जाता है।अस्वीकृति क्षेत्र का निर्धारण शोधकर्ता द्वारा चुने गए महत्त्व स्तर पर निर्भर करता है।
यदि .05 महत्त्व स्तर चुना जाता है, तो वितरण का 5 प्रतिशत भाग अस्वीकृति क्षेत्र में आता है।एक-पूँछ परीक्षण एवं द्वि-पूँछ परीक्षणएक-पूँछ परीक्षण (One-Tail Test)जब शोधकर्ता पहले से यह अनुमान लगाता है कि परिणाम केवल एक ही दिशा—धनात्मक या ऋणात्मक—में आएँगे, तब एक-पूँछ परीक्षण का प्रयोग किया जाता है।
यह परीक्षण अधिक कठोर माना जाता है।द्वि-पूँछ परीक्षण (Two-Tail Test)जब शोधकर्ता किसी निश्चित दिशा की भविष्यवाणी नहीं करता, तब द्वि-पूँछ परीक्षण का उपयोग किया जाता है। इस स्थिति में अस्वीकृति क्षेत्र वितरण के दोनों सिरों पर होता है।द्वि-पूँछ परीक्षण में .05 महत्त्व स्तरद्वि-पूँछ परीक्षण में यदि महत्त्व स्तर .05 रखा जाता है, तो—प्रत्येक पूँछ में 2.5 प्रतिशत (.0250) क्षेत्र होता हैमध्य भाग में 95 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षण क्षेत्र के अंतर्गत आता हैअर्थात् माध्य (μ) से दोनों ओर 47.5 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षण क्षेत्र में होता है।
z-मूल्य (Z-Value) का निर्धारणअस्वीकृति क्षेत्र की सीमाएँ निर्धारित करने के लिए सामान्य वितरण सारणी (Normal Distribution Table) से z-मूल्य प्राप्त किए जाते हैं।पुस्तक में दिए गए अनुसार:47.5 प्रतिशत क्षेत्र के लिए z-मूल्य ±1.96 होता हैइसका अर्थ है कि −1.96 और +1.96 के बाहर आने वाले मान अस्वीकृति क्षेत्र में आते हैं।
सीमा निर्धारण (Boundary Calculation)अस्वीकृति क्षेत्र की सीमाएँ निम्न सूत्रों से निर्धारित की जाती हैं—निम्न सीमा−1.96 × σ + μऊपरी सीमा+1.96 × σ + μजहाँ—σ = वितरण का मानक विचलनμ = जनसंख्या का माध्यपुस्तक में दिए गए उदाहरण के अनुसार—μ = 100σ = 15गणना करने पर—निम्न सीमा = 70.60ऊपरी सीमा = 129.40अतः यदि नमूने का माध्य 70.60 से कम या 129.40 से अधिक होता है, तो परिणाम सांख्यिकीय रूप से महत्त्वपूर्ण माना जाता है और शून्य परिकल्पना अस्वीकार कर दी जाती है।
निष्कर्ष इस प्रकार परिकल्पना परीक्षण की प्रक्रिया में महत्त्व स्तर का निर्धारण, अस्वीकृति एवं संरक्षण क्षेत्रों की पहचान, z-मूल्यों का उपयोग तथा शून्य परिकल्पना का परीक्षण किया जाता है। यह प्रक्रिया शोध परिणामों को संयोगजन्य त्रुटियों से अलग कर वैज्ञानिक आधार प्रदान करती है.
