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Iran par sambhavit hamla or bda jawabi baar

ईरान पर संभावित हमला और बड़ा जवाबी वार:

बढ़ते तनाव के बीच दुनिया की चिंता

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर पश्चिम एशिया सुर्खियों में है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान पर लक्षित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों पर विचार किया था, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। खबरों में यह भी आशंका जताई गई कि यदि ईरान पर हमला होता है, तो उसकी ओर से बड़ा जवाबी हमला हो सकता है।

क्या है पूरा मामला ?

अमेरिका और Iran के बीच संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं। परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच टकराव चलता रहा है। अमेरिका ने कई बार ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए, जबकि ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया।

रिपोर्टों के अनुसार, संभावित सैन्य कार्रवाई में ईरान की परमाणु सुविधाओं या रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की चर्चा थी। हालांकि आधिकारिक रूप से किसी बड़े हमले की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन इस तरह की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी।

ईरान की संभावित प्रतिक्रिया

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान पर सीधा हमला होता है, तो वह अपने क्षेत्रीय सहयोगियों और प्रॉक्सी समूहों के माध्यम से जवाब दे सकता है। पश्चिम एशिया में कई ऐसे संगठन हैं जिन पर ईरान के प्रभाव की बात कही जाती है। ऐसे में हमला केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।

वैश्विक असर – तेल बाजार पर प्रभाव – पश्चिम एशिया विश्व का प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्र है। किसी भी सैन्य टकराव से तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है।सुरक्षा खतरा – इज़राइल, खाड़ी देश और अमेरिकी ठिकाने संभावित निशाने बन सकते हैं।आर्थिक अस्थिरता – वैश्विक शेयर बाजार और व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

पहले भी बढ़ा था तनाव

जनवरी 2020 में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर क़ासिम सुलेमानी की अमेरिकी ड्रोन हमले में मौत के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। उस समय भी जवाबी हमलों और युद्ध की आशंका गहरा गई थी।कूटनीति ही समाधान?विश्लेषकों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई के बजाय कूटनीतिक वार्ता ही स्थायी समाधान दे सकती है। परमाणु समझौते (JCPOA) को पुनर्जीवित करने की कोशिशें पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन भरोसे की कमी और राजनीतिक मतभेदों ने प्रक्रिया को कठिन बना दिया।निष्कर्षअमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव केवल दो देशों का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ऐसे समय में संयम, संवाद और कूटनीति ही सबसे बेहतर रास्ता माना जा रहा है।

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