नेपाल की राजनीतिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित
नेपाल की राजनीतिक परिस्थितियों को समझने के लिए तीन बिंदु महत्वपूर्ण हैं
:1. जान-माल की हानिनेपाल लंबे समय तक आंतरिक अस्थिरता और संघर्ष से जूझता रहा है। माओवादी विद्रोह (1996–2006) के दौरान हजारों लोगों की जान गई और आम जनता हिंसा, विस्थापन और आर्थिक तंगी से प्रभावित हुई। इसके बाद भी राजनीतिक अस्थिरता और बार-बार होने वाले आंदोलनों के कारण जनता को भारी नुकसान झेलना पड़ा।
2. नेताओं के तख्तापलटनेपाल की राजनीति में तख्तापलट और सत्ता परिवर्तन लगातार होते रहे हैं। प्रधानमंत्री बार-बार बदलते हैं, संसद कई बार भंग हुई, और स्थिर सरकार बहुत कम समय तक चल पाई। उदाहरण के लिए:2008 में राजशाही की समाप्ति के बाद गणतंत्र की स्थापना हुई, लेकिन स्थायी संविधान बनाने में सालों लग गए।प्रधानमंत्री के बीच आपसी खींचतान और दल-बदल की राजनीति ने स्थिरता को कमजोर किया।ओली सरकार के दौरान भी संसद भंग और पुनःस्थापना जैसे घटनाक्रम हुए, जिससे जनता का भरोसा हिल गया।
3. जनता क्यों परेशान थी?
राजनीतिक अस्थिरता: बार-बार सरकार बदलने से विकास कार्य रुक जाते हैं।आर्थिक संकट: बेरोजगारी, महँगाई और निवेश की कमी ने आम लोगों का जीवन कठिन बना दिया।भ्रष्टाचार और दलगत राजनीति: नेताओं ने व्यक्तिगत स्वार्थ और पार्टी की राजनीति को प्राथमिकता दी, जबकि जनता की समस्याओं की अनदेखी हुई।
आपदाएँ: 2015 का भूकंप और कोविड-19 महामारी ने स्थिति और गंभीर कर दी, लेकिन सरकारें एकजुट होकर राहत नहीं पहुँचा पाईं।👉 नतीजतन, नेपाल की जनता स्थिर, जवाबदेह और विकासोन्मुखी सरकार की अपेक्षा कर रही थी, लेकिन सत्ता संघर्ष और तख्तापलट ने उनकी उम्मीदों को बार-बार तोड़ा।