पाकिस्तान में धुरंधर पर बैन पर धड़ल्ले से बन रहे इस फिल्म के गानों पर रील
पाकिस्तान में बैन के बावजूद ‘धुरंधर’ के गानों पर बन रही रील्स, सोशल मीडिया पर छाया भारतीय सिनेमा
बॉलीवुड की फिल्म ‘धुरंधर’ भले ही पाकिस्तान में आधिकारिक रूप से बैन कर दी गई हो, लेकिन इसका असर वहां के दर्शकों पर ज़्यादा देखने को नहीं मिल रहा है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब शॉर्ट्स पर पाकिस्तान के कई यूज़र्स इस फिल्म के गानों पर रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाते नज़र आ रहे हैं।
यह स्थिति एक बार फिर साबित करती है कि राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिबंध डिजिटल दौर में मनोरंजन की लोकप्रियता को पूरी तरह रोक नहीं सकते।
पाकिस्तान में लंबे समय से भारतीय फिल्मों और कंटेंट पर समय-समय पर प्रतिबंध लगाए जाते रहे हैं। सरकार और सेंसर बोर्ड की ओर से कई बार यह तर्क दिया गया कि भारतीय फिल्में स्थानीय संस्कृति और फिल्म इंडस्ट्री पर नकारात्मक असर डालती हैं।
इसी कड़ी में फिल्म धुरंधर को भी पाकिस्तान में रिलीज़ की अनुमति नहीं दी गई। इसके बावजूद इंटरनेट और सोशल मीडिया के ज़रिए फिल्म का संगीत सरहद पार कर लोगों तक पहुंच गया।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही रील्स में देखा जा सकता है कि पाकिस्तान के युवा धुरंधर के लोकप्रिय गानों पर एक्टिंग, डांस और लिप-सिंक करते हुए वीडियो बना रहे हैं। कई वीडियो लाखों व्यूज़ और हजारों लाइक्स बटोर चुके हैं।
हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई यूज़र्स खुले तौर पर यह भी स्वीकार कर रहे हैं कि फिल्म बैन होने के बावजूद वे इसके गाने सुनते हैं और पसंद करते हैं।
डिजिटल एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के समय में कंटेंट को पूरी तरह बैन करना लगभग असंभव हो गया है। यूट्यूब म्यूज़िक, इंस्टाग्राम ऑडियो लाइब्रेरी और थर्ड-पार्टी प्लेटफॉर्म्स के ज़रिए गाने आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
इसके अलावा वीपीएन और अन्य तकनीकी साधनों की मदद से लोग बैन किए गए कंटेंट तक भी पहुंच बना लेते हैं। यही वजह है कि धुरंधर के गाने पाकिस्तान में भी उतने ही लोकप्रिय होते जा रहे हैं जितने भारत में।फिल्मी जानकारों का कहना है कि भारतीय सिनेमा की पकड़ सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संगीत, डायलॉग्स और ट्रेंड्स भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डालते हैं।
पाकिस्तान में पहले भी कई भारतीय फिल्मों और गानों को जबरदस्त लोकप्रियता मिल चुकी है, चाहे वे आधिकारिक रूप से रिलीज़ हुए हों या नहीं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बैन लगाना वास्तव में कारगर उपाय है। सोशल मीडिया के दौर में लोग वही कंटेंट देखते और सुनते हैं, जो उन्हें पसंद आता है, चाहे उस पर कितने ही प्रतिबंध क्यों न लगे हों।
धुरंधर के गानों पर बन रही रील्स यह साफ दिखाती हैं कि कला और मनोरंजन की कोई सीमा नहीं होती।अंततः यह कहा जा सकता है कि पाकिस्तान में धुरंधर फिल्म पर लगा बैन उसके गानों की लोकप्रियता को रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। सोशल मीडिया ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दर्शकों की पसंद किसी सरकारी आदेश से नहीं, बल्कि उनके दिल और रुचि से तय होती है।
देखा जाए तो हिन्दुस्तान और पाकिस्तान अलग नहीं उनका दिल हमारे दिल से अलग नहीं है लेकिन कुछ गलत लोगों की वजह से अच्छे लोग भी बुरे लोगों की कतार में शामिल हो जाते हैं। जब ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तानी ड्रामा को बैन कर दिया गया था तो हिन्दुस्तान के लोग जो कि दीवाने है दुनिया में सबसे ज्यादा पाकिस्तान के सीरियल हिंदुस्तान में ही देखे जाते हैं । तब जब लोग यूट्यूब ऑन करते तो कंटेंट आता ही नहीं था ।फिर उधर के लोग टीवी पर जाकर facebook page पर जाकर रील बनाकर इधर भेजते थे हर स्टेप का अलग अलग रील ।तो कंटेंट देखने वाले जिगर बिठा ही लेते हैं । इसी तरह वो हमारी फिल्मों के दीवाने हैं।
