वायरल की भीड़ में खोती संवेदनाएँ
इंटरनेट की दुनिया मायावी है… स्क्रॉलिंग करते वक्त हम दुनिया जहान सब भूल जाते हैं… वायरल होने के लिए जाने क्या-क्या पापड़ बेलते रहते हैं, सोचते हैं कि शायद कोई वीडियो वायरल हो जाए और हम रातों-रात स्टार बन जाएँ और अकाउंट में डॉलर की एंट्री हो…लेकिन सोशल मीडिया में भी सबकी किस्मत नहीं चमकती। कोई अश्लील वीडियो डालता है और लोगों को अच्छा लगने लगता है, कोई बहुत मेहनत करता है लेकिन लोग उसके वीडियो को स्क्रॉल कर देते हैं — ओह, क्या ही चीज बनाई है, फालतू टाइम पास करते रहता है।
और अब तो मुझे ऐसा लगने लगा है कि कुछ दिनों में ऐसा हो जाएगा कि जैसे हमदर्द दवाखाना और कई गुप्त रोगों के इलाज दीवार के पीछे हुआ करते थे, वैसे रील देखने की बीमारी छुड़ाने के भी इलाज करवाने पड़ेंगे…लोग वायरल होने के लिए क्या-क्या करते हैं। कभी-कभी तो लोग ऑनलाइन आत्महत्या भी कर लेते हैं, उनकी वीडियो वायरल हो जाती है… लेकिन क्या एक सेकंड के लिए वे यह नहीं सोचते कि मर ही जाएंगे तो उन लाइक्स और कमेंट्स का एक्सेस भगवान के घर में तो नहीं होगा, उधर न मोबाइल है न इंटरनेट है…ये बातें जो मैं कह या लिख रही हूँ, वो तो सबको पता है। कुछ नया क्या है? कुछ भी नहीं।
बस एक छोटे से बंदर के बच्चे को पूरी दुनिया दुलार कर रही है और इंटरनेट जो रातों-रात वायरल हो गया है। प्यार इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो वायरल हो गया है…उसकी माँ मर गई या उसे छोड़कर चली गई, मुझे नहीं पता। लेकिन वो बहुत छोटा है, तो उसके केयरटेकर ने उसे एक सॉफ्ट टॉय लाकर दे दिया और वो दिन-रात उसके साथ खेलता है। अकेला है, छोटा है, तो खेलेगा — अपनी माँ समझे या दोस्त, या हो सकता है वो टॉय भी समझ रहा हो। ये हमारा प्रेडिक्शन है, बंदर के बच्चे का नहीं… मैं भी कई दिनों से देख रही हूँ…
आज मैने आज मैंने देखा कि अख़बार के एक पन्ने पर वही खिलौना ऑनलाइन मेरे इलाके में बेचा जा रहा है, जो कोई बहुत हाई-फाई इलाका भी नहीं है। तब मैं सोचने पर मजबूर हो गई कि बताइए, क्या वह “पंच” बंदर ही अकेला है दुनिया में जिसे माँ ने छोड़ दिया?अगर आप अपने आस-पास नज़र दौड़ाकर देखेंगे तो न जाने कितने कुत्तों और बिल्लियों के बच्चे होंगे, बंदर भी होंगे, जिनके जंगल काटकर हम वहाँ घर बनाकर रह रहे हैं।
और वे खुद चोरों की तरह हमसे छुप-छुप कर जी रहे हैं।और अगर कभी वे घर में घुस जाएँ तो हम एक रोटी का टुकड़ा तक नहीं दे सकते, बल्कि मारकर भगा देंगे।कहने का तात्पर्य यह है कि “पंच” को इतना वायरल कर रहे हो, उससे पंच का क्या फायदा? उसे न फॉलोअर्स बढ़ाने हैं, न लाइक्स की ही भूख है। ऊपर से खिलौना बनाने वाली कंपनियाँ आपदा में अवसर ढूँढ़ रही हैं।
वायरल करना है तो किसी ज़रूरतमंद को कीजिए — किसी के हाथ नहीं हैं, किसी के पैर नहीं हैं, कोई अपनी प्रतिभा दिखा रहा है। अगर उसके चैनल को लाइक और सब्सक्राइब कर देंगे तो उसका भला हो जाएगा।यहाँ एक पंच ही नहीं, बहुत से दुखी लोग हैं — बच्चे, बुजुर्ग। हमें ज़रूरत है कि जिसे हमारी ज़रूरत है, उसकी ज़रूरत को हम पूरा करें, अगर भगवान ने हमें इस काबिल बनाया है तो।मेरी संवेदना पंच के साथ है, लेकिन मैं उन लोगों के लिए लिख रही थी जो व्यर्थ में ऊल-जलूल चीज़ों को समर्थन करते हैं, जिससे किसी का कोई भला नहीं हो सकता। इसलिए अपने बुद्धि-विवेक से काम लें।
