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X Twitter पर दिख रहे search.app सर्च ने बढ़ाई यूजर्स की की चिंता

X (ट्विटर) पर दिख रहे search.app लिंक ने बढ़ाई यूज़र्स की चिंता, जानिए क्या है पूरा मामला /Source: Xहाल के दिनों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले ट्विटर) पर एक नया तरह का लिंक लोगों का ध्यान खींच रहा है। कई यूज़र्स ने देखा कि जब किसी पोस्ट में किसी वेबसाइट या न्यूज़ आर्टिकल का लिंक शेयर किया जा रहा है, तो वह सीधे वेबसाइट के नाम से न दिखकर https://search.app/ से शुरू हो रहा है। इस नए लिंक फॉर्मेट को देखकर यूज़र्स के मन में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर यह search.app क्या है, क्या यह सुरक्षित है और क्या इससे उनकी प्राइवेसी पर कोई असर पड़ेगा।

क्या है search.app लिंक?

दरअसल search.app कोई अलग वेबसाइट नहीं है, बल्कि यह गूगल द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक रीडायरेक्ट लिंक सिस्टम है। जब कोई यूज़र एंड्रॉयड फोन में Google App या Google Discover के जरिए किसी वेबपेज को खोलता है और फिर उसे शेयर करता है, तो कई बार वह लिंक सीधे वेबसाइट का न होकर search.app के माध्यम से शेयर हो जाता है।इसका मतलब यह है कि search.app लिंक पहले गूगल के सर्वर से होकर गुजरता है और फिर असली वेबसाइट पर रीडायरेक्ट करता है।

X पर क्यों दिख रहे हैं ऐसे लिंक?

X पर शेयर किए गए कई पोस्ट एंड्रॉयड यूज़र्स द्वारा किए जाते हैं। जब ये यूज़र Google App से कोई कंटेंट पढ़कर उसे X पर शेयर करते हैं, तो लिंक अपने आप search.app फॉर्मेट में बदल जाता है। इसी वजह से हाल ही में X पर इस तरह के लिंक अचानक ज्यादा दिखाई देने लगे हैं।

यूज़र्स क्यों हो रहे हैं परेशान ?

सोशल मीडिया पर कई यूज़र्स ने चिंता जताई है कि लिंक असली वेबसाइट का नाम नहीं दिखा रहा है।यह किसी तरह का ट्रैकिंग लिंक हो सकता है।कहीं यह डेटा कलेक्शन या प्राइवेसी से जुड़ा खतरा तो नहीं हैं।कुछ यूज़र्स ने इसे “मिस्ट्री लिंक” तक कह दिया है, क्योंकि आम लोग इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते।

क्या search.app लिंक सुरक्षित है?

जानकारों के अनुसार, search.app कोई मैलवेयर या स्कैम वेबसाइट नहीं है। यह गूगल का ही एक रीडायरेक्ट सिस्टम माना जा रहा है। हालांकि, यह भी सच है कि ऐसे लिंक के जरिए गूगल यह जान सकता है कि:लिंक कितनी बार क्लिक हुआ है किस प्लेटफॉर्म से शेयर किया गया है।यूज़र किस डिवाइस से आया यानी, यह एक तरह का ट्रैकिंग मैकेनिज़्म हो सकता है, जैसा कि X का t.co या गूगल का g.co लिंक सिस्टम है।

प्राइवेसी को लेकर सवाल डिजिटल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही search.app लिंक खतरनाक न हो, लेकिन यह प्राइवेसी के नजरिए से बहस का विषय जरूर है। आज के समय में यूज़र पहले से ही डेटा ट्रैकिंग को लेकर सतर्क हैं, ऐसे में बिना जानकारी के लिंक का इस तरह बदल जाना लोगों को असहज कर रहा है।

वेबसाइट ओनर्स के लिए चिंता

वेबसाइट चलाने वालों का भी मानना है कि:search.app लिंक से ब्रांड नेम छिप जाता है

यूज़र को यह समझ नहीं आता कि वह किस वेबसाइट पर जा रहा है SEO और डायरेक्ट ट्रैफिक पर असर पड़ सकता है।कुछ पब्लिशर्स का कहना है कि अगर यूज़र को लिंक पर भरोसा न हो, तो वह क्लिक ही नहीं करेगा।

कैसे बचें या क्या करें?

अगर आप चाहें तो:लिंक शेयर करने से पहले उसे मैनुअली कॉपी करके शेयर करें ।ब्राउज़र से डायरेक्ट लिंक ओपन करके शेयर करें।अनजान search.app लिंक पर क्लिक करने से पहले सावधानी बरतें ।

निष्कर्ष

X पर दिख रहे search.app लिंक कोई साइबर हमला नहीं हैं, लेकिन यह जरूर दिखाते हैं कि आज के डिजिटल युग में लिंक शेयरिंग भी पहले जैसी सरल नहीं रही। गूगल की यह तकनीक सुविधा और डेटा एनालिटिक्स के लिए हो सकती है, लेकिन यूज़र्स और वेबसाइट ओनर्स दोनों के लिए पारदर्शिता बेहद जरूरी है। आने वाले समय में अगर गूगल इस पर आधिकारिक बयान देता है, तो स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। वरना लोग तो कयास ही लगा सकते हैं।

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