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आज दिवाली के दिन बॉलीवुड का जगमगाता दिया बुझ गया

हंसी के बादशाह असरानी ने आज दुनिया को कहा अलविदा

जन्म से लेकर मृत्यु तक का संपूर्ण जीवन – हंसी के बादशाह असरानी: जन्म से मृत्यु तक का जीवन सफर परिचय भारतीय सिनेमा की कॉमेडी की दुनिया में एक ऐसा नाम जिसने अपने अभिनय, संवाद और मासूम हंसी से करोड़ों दिलों को जीता — वह नाम है गोवर्धन असरानी (Govardhan Asrani)।

“हम अंग्रेज़ों के ज़माने के जेलर हैं…” जैसा डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर है। असरानी केवल एक कॉमेडियन नहीं, बल्कि हिंदी फिल्मों के इतिहास का ऐसा चेहरा थे जिन्होंने हंसी को एक कला का रूप दिया।– जन्म और प्रारंभिक जीवन – असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को जयपुर, राजस्थान में एक सिंधी परिवार में हुआ था

।उनका पूरा नाम गोवर्धन असरानी था। बचपन से ही असरानी को अभिनय का जुनून था।

वे स्कूल और कॉलेज के दिनों में नाटकों में हिस्सा लेते थे।उन्होंने अपनी पढ़ाई जयपुर से पूरी की और बाद में फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII, पुणे) से अभिनय की ट्रेनिंग ली। यहीं से उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ।–

फ़िल्मी करियर की शुरुआत – असरानी ने अपने करियर की शुरुआत 1967 में फ़िल्म “हरे कांच की चुड़ियां” से की।

इसके बाद वे लगातार मेहनत करते गए और जल्द ही हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बना ली।1970 और 1980 का दशक असरानी के करियर का स्वर्णिम दौर साबित हुआ।वे उस समय के लगभग हर बड़े अभिनेता के साथ स्क्रीन शेयर कर चुके थे —राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, जया भादुरी, ऋषि कपूर आदि।-

प्रसिद्ध फ़िल्में और यादगार भूमिकाएँ – असरानी ने अपने करियर में 350 से अधिक फिल्मों में काम किया।

उनकी कुछ मशहूर फिल्में हैं —शोले (1975) — जेलर की हास्य भूमिका जिसने उन्हें अमर बना दिया।

चुपके चुपके (1975)अभिमान (1973)गोलमाल (1979)अमर अकबर एंथनी (1977) बावर्ची, कटी पतंग, राजा बाबू, हेरा फेरी, दुल्हे राजा, देवदास आदि।उनकी कॉमेडी टाइमिंग, चेहरे के हाव-भाव और संवाद की प्रस्तुति उन्हें बाकी सभी हास्य कलाकारों से अलग बनाती थी।—

टीवी करियर – असरानी ने छोटे पर्दे पर भी अपनी अदाकारी का जादू चलाया।टीवी शो “भाभी”, “हां मैं घर पर हूं” और कई हास्य धारावाहिकों में उन्होंने शानदार काम किया।—

जब शोले फिल्म में सिप्पी साहब ने कहा कि उन्हें इस रोल में हिटलर का अंदाज चाहिए और उन्होंने वाकई उस सीन को जीवंत बना दिया और डायलॉग्स भले आज कल के बच्चे उन्हें पहचाने या न पहचाने लेकिन ये डायलॉग्स तो सभी बोलते अपने पापा से सुनकर बड़े हो रहें हैं हम अंग्रेजों के ज़माने के जेलर हैं ।

आप चाहे इस दुनिया में हो या उस दुनिया में लेकिन हमारे दिलों में आपके लिए हमेशा जगह रहेगी । भगवान आपकी आत्म को शांति दे।

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