yudh ka asar dikh rha bharat me bhi rasoi guess ki kami se kai restaurant band
:ईरान-अमेरिका तनाव का असर भारत में
, तेल-गैस आपूर्ति प्रभावित होने से नोएडा में कई रेस्टोरेंट बंदईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के कई देशों के साथ-साथ भारत में भी दिखाई देने लगा है। मध्य-पूर्व क्षेत्र में जारी टकराव के कारण तेल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे भारत के कई शहरों में कमर्शियल गैस सिलेंडर की कमी देखने को मिल रही है।
इस स्थिति का सबसे ज्यादा प्रभाव होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ा है। उत्तर प्रदेश के नोएडा में गैस की कमी के कारण कई रेस्टोरेंट और फूड आउटलेट को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है।दरअसल भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। खासकर तेल और एलपीजी गैस के लिए भारत काफी हद तक खाड़ी देशों पर निर्भर है। जब भी मध्य-पूर्व में किसी प्रकार का सैन्य तनाव या युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो उसका असर सीधे ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। इसी कारण से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने लगती है।
हाल के दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता पैदा कर दी है, जिसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है।नोएडा और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कई रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि उन्हें समय पर कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। गैस एजेंसियों के पास सिलेंडर का स्टॉक सीमित है और सप्लाई भी पहले की तुलना में धीमी हो गई है। ऐसे में रेस्टोरेंट के किचन को सुचारू रूप से चलाना मुश्किल हो गया है। कई रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि जब गैस ही उपलब्ध नहीं होगी तो खाना बनाना संभव नहीं है, इसलिए उन्हें मजबूरी में अपने प्रतिष्ठान अस्थायी रूप से बंद करने पड़ रहे हैं।कुछ रेस्टोरेंट ने पूरी तरह बंद होने की बजाय अपने कामकाज को सीमित कर दिया है। कई जगहों पर मेन्यू को छोटा कर दिया गया है, ताकि कम गैस में भी काम चल सके।
वहीं कुछ रेस्टोरेंट इलेक्ट्रिक स्टोव या इंडक्शन जैसे वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इन तरीकों से बड़े पैमाने पर खाना बनाना आसान नहीं है। इसके अलावा बिजली की लागत भी बढ़ जाती है, जिससे कारोबारियों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।रेस्टोरेंट उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका असर पूरे कारोबार पर पड़ सकता है। छोटे और मध्यम स्तर के रेस्टोरेंट पहले ही बढ़ती महंगाई, किराया और अन्य खर्चों के दबाव में काम कर रहे हैं। ऐसे में गैस की कमी उनकी परेशानियों को और बढ़ा रही है।
कई कारोबारियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो उन्हें अपने व्यवसाय को कुछ समय के लिए पूरी तरह बंद करने का फैसला लेना पड़ सकता है।इस संकट का असर केवल रेस्टोरेंट मालिकों तक सीमित नहीं है। इससे हजारों कर्मचारियों की रोज़गार पर भी खतरा मंडरा रहा है। होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं, जिनकी आय सीधे तौर पर इन संस्थानों के संचालन पर निर्भर करती है। यदि रेस्टोरेंट बंद होते हैं या उनका कामकाज कम होता है, तो कर्मचारियों की आमदनी पर भी सीधा असर पड़ता है।विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले किसी भी बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
खासकर ऊर्जा क्षेत्र इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने से कई देशों की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर हैं, वहां इसका प्रभाव और भी तेजी से महसूस किया जाता है।फिलहाल रेस्टोरेंट संचालकों और व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में हालात सुधरेंगे और गैस की आपूर्ति फिर से सामान्य हो जाएगी। यदि सप्लाई व्यवस्था जल्द ठीक हो जाती है तो बंद हुए रेस्टोरेंट दोबारा खुल सकते हैं और कारोबार भी धीरे-धीरे पटरी पर लौट सकता है। लेकिन तब तक नोएडा और आसपास के इलाकों में रेस्टोरेंट उद्योग को इस चुनौतीपूर्ण दौर का सामना करना पड़ रहा है।
