अगर आपकी कुंडली में सूर्य सप्तम मे है तो क्या करें ।
written by pandit Vashisth narayan
यदि आ कुंडली में सूर्य सप्तम स्थान पर हाई तो जानिये इस्के प्रभाव
, तो इसका प्रभाव मुख्यतः विवाह, जीवनसाथी, वैवाहिक सुख, रिश्तों की गुणवत्ता और भाग्य के परिपक्व फल पर देखा जाता है।आपने बताया:सप्तम भाव में सूर्य + गुरुउन पर राहु की पूर्ण दृष्टिसाथ में बुध + मंगल भी सप्तम में1. सूर्य + गुरु सप्तम भाव में (D9)यह योग बताता है कि जीवनसाथी शिक्षित, सम्मानित, आत्मविश्वासी या नेतृत्व गुणों वाला हो सकता है।
लेकिन सूर्य सप्तम में होने से:पति-पत्नी दोनों में “मैं सही हूँ” वाली भावना आ सकती है।अहंकार के कारण टकराव हो सकते हैं।जीवनसाथी का व्यक्तित्व प्रभावशाली हो सकता है।
गुरु साथ होने से:रिश्ता टूटने से बचता है।समझदारी और नैतिकता बनी रहती है।कठिन समय में भी विवाह को संभालने की क्षमता रहती है।2. राहु की दृष्टिराहु विवाह में कुछ असामान्यता ला सकता है:विवाह में देरी।
प्रेम विवाह या अंतरजातीय विवाह की संभावना।जीवनसाथी अलग संस्कृति, राज्य या देश से हो सकता है।रिश्ते में संदेह, भ्रम या दूरी के दौर आ सकते हैं।राहु सूर्य पर दृष्टि डाले तो:अहंकार संघर्ष बढ़ सकता है।समाज या परिवार के कारण तनाव आ सकता है।3. बुध + मंगलइसे कई ज्योतिषी बुध-मंगल योग कहते हैं।
फल:व्यक्ति बहुत तेज दिमाग वाला होता है।तर्क-वितर्क में मजबूत।बोलने की कला अच्छी।लेकिन गुस्से में तीखे शब्द बोल सकता है।वैवाहिक जीवन में:छोटी बातों पर बहस।दोनों पक्ष अपनी बात मनवाने की कोशिश करते हैं।
संवाद अच्छा रहे तो रिश्ता मजबूत रहता है।संयुक्त फलइस पूरे योग से लगता है:✅ जीवनसाथी बुद्धिमान और प्रभावशाली होगा।✅ विवाह के बाद भाग्य में वृद्धि हो सकती है।✅ पति-पत्नी दोनों अपने क्षेत्र में सम्मान पा सकते हैं।⚠️ लेकिन अहंकार, बहस और गलतफहमी से सावधान रहना होगा।
राहु के कारण कुछ समय ऐसे आ सकते हैं जब रिश्ते में दूरी या भ्रम महसूस हो।✅ गुरु की उपस्थिति अंततः संबंध को बचाने और संभालने की शक्ति देती है।यदि आप D1 लग्न, D9 लग्न और राहु किस भाव से दृष्टि दे रहा है बता दें
note यह विश्लेशन केवल एक संभावना है क्युकि सबके ग्रह नक्ष्त्र अलग होते है अगर आप अपना कुंडली दिखवाना चाहते हैं तो हमारे पंडित जी को अपनी समस्या बताए वो सही सही बतायेंगे। आप अपनी समस्या हमें mail भी कर सकते हैं।
