मधुबनी मिथिला पेंटिंग ने रचा इतिहास
मधुबनी की मिथिला कला ने रचा इतिहास,
108 मीटर लंबी रामायण पेंटिंग ने बनाया विश्व रिकॉर्डमधुबनी। बिहार की प्रसिद्ध मिथिला पेंटिंग ने एक बार फिर देश-दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
मधुबनी में रामचरितमानस की गाथा को मिथिला चित्रकला की पारंपरिक शैली में उकेरते हुए 108 मीटर लंबी विशाल पेंटिंग तैयार की गई है। करीब 180 वर्तमान एवं पूर्व छात्र-छात्राओं ने चार दिनों की मेहनत से इस ऐतिहासिक कलाकृति को आकार दिया। इसे वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन की ओर से विश्व रिकॉर्ड के रूप में मान्यता दी गई।
52 प्रमुख प्रसंगों में दिखाई गई रामायण की गाथाइस विशाल पेंटिंग में रामचरितमानस और रामायण से जुड़े 52 प्रमुख प्रसंगों को मिथिला कला की पारंपरिक रेखाओं, रंगों और प्रतीकों के माध्यम से चित्रित किया गया है। खास बात यह है कि चित्रों के साथ रामचरितमानस के श्लोकों और दोहों को भी स्थान दिया गया है, जिससे यह कलाकृति कला, साहित्य और संस्कृति का अनूठा संगम बन गई है।चार दिनों में तैयार हुई ऐतिहासिक कलाकृतिमिथिला चित्रकला संस्थान के कलाकारों ने महज चार दिनों में 108 मीटर लंबे कैनवास पर यह विशाल पेंटिंग तैयार की।
इस सामूहिक प्रयास में संस्थान के वर्तमान और पूर्व विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। वरिष्ठ कलाकारों और पद्मश्री कलाकारों के मार्गदर्शन में तैयार हुई इस कलाकृति में मिथिला की पारंपरिक चित्रांकन शैली को बेहद व्यापक रूप में प्रस्तुत किया गया है।वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन ने दी मान्यतापेंटिंग का निरीक्षण और मानकीकरण किए जाने के बाद वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन की ओर से इसे विश्व रिकॉर्ड में शामिल किया गया। रिकॉर्ड से जुड़े प्रमाण-पत्र और मेडल भी प्रदान किए गए। यह उपलब्धि मधुबनी और पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय बनी है।
डिजिटल बाजार से जुड़ेंगे मिथिला के कलाकारइस उपलब्धि के साथ मधुबनी में मिथिला पेंटिंग-सह-ई-कॉमर्स पोर्टल की शुरुआत भी की गई। इसका उद्देश्य स्थानीय कलाकारों और उनकी कलाकृतियों को डिजिटल माध्यम से व्यापक और वैश्विक बाजार तक पहुंचाना है। इस पहल से मिथिला कला को नई पहचान और कलाकारों को नए बाजार मिलने की उम्मीद है।
मधुबनी की 108 मीटर लंबी यह पेंटिंग केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि मिथिला की सदियों पुरानी कला परंपरा, रामायण की सांस्कृतिक विरासत और नई पीढ़ी के कलाकारों की रचनात्मक क्षमता का शानदार उदाहरण बनकर सामने आई है।
