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“थलापति” से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तक: विजय के संघर्ष, स्टारडम और सत्ता तक पहुंचने की ऐतिहासिक कहानी

Vijay का सफर अब केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। जिस अभिनेता को कभी लोग बड़े पर्दे का “मसीहा” कहते थे, वही आज तमिलनाडु की राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा बन चुका है। सिनेमा के पर्दे पर गरीबों और आम जनता की आवाज उठाने वाले विजय ने अब वास्तविक राजनीति में भी इतिहास रच दिया है।

10 मई 2026 का दिन तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गया, जब विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर दशकों पुरानी राजनीतिक परंपरा को तोड़ दिया।साधारण शुरुआत, असाधारण सफलता22 जून 1974 को जन्मे विजय ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की थी।

उनके पिता एस.ए. चंद्रशेखर फिल्म निर्देशक थे, लेकिन इसके बावजूद सफलता उन्हें आसानी से नहीं मिली। शुरुआती फिल्मों में आलोचना झेलने के बाद भी विजय ने हार नहीं मानी।धीरे-धीरे उन्होंने तमिल सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई। घिल्ली, थुप्पाक्की, मर्सल, मास्टर और लियो जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। उनकी फिल्मों में आम आदमी की लड़ाई, भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज और न्याय की भावना दिखाई देती थी।

यही कारण था कि लोग उन्हें केवल अभिनेता नहीं, बल्कि अपनी उम्मीदों का चेहरा मानने लगे।फिल्मों से जनता के दिल तकविजय के फैन क्लब वर्षों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे। रक्तदान शिविर, गरीब बच्चों की शिक्षा और जरूरतमंदों की सहायता जैसे अभियानों ने उन्हें जनता से और करीब कर दिया। धीरे-धीरे उनके समर्थकों के बीच यह चर्चा होने लगी कि विजय केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहेंगे।जब उन्होंने राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलना शुरू किया, तब तमिलनाडु की राजनीति में हलचल बढ़ गई।

युवाओं में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती चली गई।राजनीति में ऐतिहासिक एंट्रीसाल 2024 में विजय ने अपनी राजनीतिक पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam की घोषणा की। इस फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति को नई दिशा दे दी।विजय ने राजनीति को “सेवा का माध्यम” बताते हुए युवाओं, किसानों और महिलाओं के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही। उनकी सभाओं में उमड़ती भीड़ ने साफ कर दिया कि जनता उन्हें गंभीर राजनीतिक विकल्प के रूप में देखने लगी है।

चुनावी जीत और सत्ता तक पहुंच2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी। सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनाने का रास्ता साफ हुआ और आखिरकार विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया।यह जीत इसलिए भी ऐतिहासिक मानी जा रही है क्योंकि तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से पारंपरिक दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही थी। विजय ने उस राजनीतिक ढांचे को चुनौती देते हुए खुद को नई पीढ़ी के नेता के रूप में स्थापित किया।

मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने के भावुक पलशपथ ग्रहण समारोह के दौरान विजय बेहद भावुक नजर आए। हजारों समर्थकों के बीच जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब पूरा माहौल तालियों और नारों से गूंज उठा। “सीएम विजय” के नारे लगातार सुनाई दे रहे थे और उनके समर्थक इसे जनता की जीत बता रहे थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले संबोधन में विजय ने कहा कि यह केवल उनकी जीत नहीं बल्कि तमिलनाडु की जनता के विश्वास की जीत है। उन्होंने पारदर्शी शासन, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं के भविष्य और सामाजिक न्याय को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया।मुख्यमंत्री बनते ही बड़े फैसलेशपथ लेने के तुरंत बाद विजय ने जनता से जुड़े कई अहम फैसले लेने की घोषणा की।

बिजली, शिक्षा, महिलाओं की सुरक्षा और नशे के खिलाफ अभियान जैसे मुद्दों पर उनकी सरकार सक्रिय नजर आई।इन फैसलों के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि विजय केवल लोकप्रिय अभिनेता ही नहीं बल्कि मजबूत प्रशासक बनने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।एक नए युग की शुरुआत?

सिनेमा के पर्दे से निकलकर सत्ता के सबसे बड़े मंच तक पहुंचे विजय का सफर अब भारतीय राजनीति की सबसे चर्चित कहानियों में शामिल हो चुका है।जो अभिनेता कभी फिल्मों में जनता के लिए लड़ता दिखाई देता था, आज वही असल जिंदगी में करोड़ों लोगों की उम्मीदों का नेतृत्व कर रहा है। तमिलनाडु की जनता अब यह देख रही है कि “थलापति” का यह राजनीतिक अध्याय राज्य को किस दिशा में ले जाता है।

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