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बुनियादी आवश्यकता दृष्टिकोण (Basic Need Approach): विकास का असली लक्ष्य मानव कल्याण ।

बुनियादी आवश्यकता दृष्टिकोण (Basic Need Approach) विकास की ऐसी अवधारणा है, जिसमें आर्थिक विकास का केंद्र केवल उत्पादन, पूंजी निवेश या आय बढ़ाना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति और बेहतर जीवन सुनिश्चित करना है।

इस दृष्टिकोण के अनुसार किसी देश का विकास तभी सार्थक माना जा सकता है, जब आम लोगों को भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।

बुनियादी आवश्यकता दृष्टिकोण की शुरुआतबुनियादी आवश्यकता दृष्टिकोण का प्रारंभिक विकास 1972 में अर्जेंटीना की Bariloche Foundation द्वारा विकसित विश्व मॉडल से जोड़ा जाता है।

इस मॉडल में लोगों की बुनियादी जरूरतों को केंद्र में रखते हुए संसाधनों की उपलब्धता और पर्यावरणीय सीमाओं को ध्यान में रखा गया था।

बाद में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने 1976 में आयोजित World Employment Conference में Basic Needs Approach को विकास और रोजगार की चर्चा में महत्वपूर्ण स्थान दिया। इसका उद्देश्य यह था कि आर्थिक नीतियों का लाभ समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों तक भी पहुंचे।

क्या है Basic Need Approach?

सरल शब्दों में, यह ऐसा विकास दृष्टिकोण है जिसमें “लोग पहले, आर्थिक आंकड़े बाद में” की सोच दिखाई देती है।इसका मानना है कि केवल GDP बढ़ने या उद्योगों और पूंजी में वृद्धि होने से विकास पूरा नहीं हो जाता।

यदि समाज के एक बड़े हिस्से को पर्याप्त भोजन, सुरक्षित आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे आर्थिक विकास को वास्तविक मानवीय विकास नहीं कहा जा सकता।

इसलिए Basic Need Approach का मुख्य उद्देश्य लोगों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है।

बुनियादी आवश्यकताएं कौन-कौन सी हैं?

इस दृष्टिकोण के अंतर्गत मुख्य रूप से निम्न आवश्यकताओं पर जोर दिया जाता है—पर्याप्त भोजन और पोषणसुरक्षित एवं सम्मानजनक आवासशिक्षा की सुविधास्वास्थ्य सेवाएंरोजगार के अवसरसामाजिक सुरक्षास्वच्छ पेयजल एवं स्वच्छतासामाजिक न्याय और समान अवसरइन सुविधाओं को केवल कल्याणकारी योजनाओं के रूप में नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक आधार माना जाता है।

पूंजी निवेश से आगे मानव संसाधन पर जोरBasic Need Approach का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह विकास को केवल पूंजी निवेश से जोड़कर नहीं देखता। इसके बजाय मानव संसाधन में निवेश को भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

उदाहरण के लिए, किसी देश में बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां बन जाएं, लेकिन वहां के लोगों को अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधा न मिले, तो विकास अधूरा माना जाएगा। इसके विपरीत शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल और रोजगार में निवेश लोगों को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करता है।सामाजिक न्याय और समान वितरणइस दृष्टिकोण में धन और आय के समान तथा न्यायपूर्ण वितरण पर भी जोर दिया जाता है।

इसका उद्देश्य समाज में मौजूद अत्यधिक आर्थिक असमानता और गरीबी को कम करना है।यही कारण है कि Basic Need Approach का संबंध सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी विकास से भी जोड़ा जाता है।गांधीवादी विचारधारा से समानताBasic Need Approach की सोच कई स्तरों पर गांधीवादी दर्शन के करीब दिखाई देती है।

गांधीजी विकास को केवल भौतिक संपन्नता के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति के कल्याण को भी महत्वपूर्ण मानते थे।ग्रामीण विकास, आत्मनिर्भरता, सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के कल्याण पर जोर देने के कारण Basic Need Approach को गांधीवादी विकास चिंतन के साथ भी जोड़ा जाता है।

Basic Need Approach की प्रमुख विशेषताएं

1. मानव-केंद्रित विकास: विकास का केंद्र आम व्यक्ति और उसका जीवन है।

2. गरीबी उन्मूलन: गरीब और वंचित वर्गों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाती है।

3. सामाजिक न्याय: संसाधनों और अवसरों के अधिक न्यायपूर्ण वितरण पर जोर दिया जाता है।

4. शिक्षा एवं स्वास्थ्य: शिक्षा और स्वास्थ्य को बेहतर जीवन की बुनियादी शर्त माना जाता है।

5. ग्रामीण विकास: ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

6. रोजगार: लोगों को सम्मानजनक और पर्याप्त रोजगार उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है।

7. पर्यावरणीय संतुलन: विकास के साथ पर्यावरणीय सीमाओं को भी ध्यान में रखा जाता है।आधुनिक विकास के संदर्भ में महत्वआज के समय में Basic Need Approach और भी महत्वपूर्ण हो गया है। केवल आर्थिक वृद्धि के आंकड़े किसी देश के वास्तविक विकास को पूरी तरह नहीं बताते।

किसी देश की प्रगति का आकलन इस बात से भी किया जाना चाहिए कि वहां के लोगों को कितनी अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा मिल रही है।इसी मानवीय दृष्टिकोण ने आगे चलकर Human Development और Inclusive Development जैसी अवधारणाओं को समझने में भी महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया।

निष्कर्ष

Basic Need Approach हमें यह समझाता है कि विकास का अंतिम उद्देश्य केवल अर्थव्यवस्था को बड़ा बनाना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन को बेहतर बनाना है।

जब प्रत्येक व्यक्ति को भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलती हैं, तभी विकास को वास्तविक और सार्थक कहा जा सकता है।इसलिए यह दृष्टिकोण मानव-केंद्रित, समानतापूर्ण और सामाजिक न्याय पर आधारित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण विचार प्रस्तुत करता है।

UGC NET जैसे परीक्षाओं के लिए इसका सबसे महत्वपूर्ण सार याद रखें—“Economic growth से आगे बढ़कर Basic Needs की पूर्ति और Human Welfare पर जोर।”

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